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Saturday, May 22, 2010

मान म्हारी मेहंदी रो रख जायो...

चांदी की कटोरी में घुलवायो-२,
मंडवा ले दादी मेहंदी ल्यायो,
मान म्हारी मेहंदी रो रख जायो.........,

मेहंदी भरया हाथ थारा प्यारा घणा लागे,
सोवणी सी मेहंदी दादी म्हारे से मंडा ले
मंदुंगा दादी थारी मनचायो...........,

राचणी या मेहंदी दादी थारे मन भासी,
देख ले मंडाके घणी दाए ठाणे आसी,
कारीगरी मांडने की सिख आयो.........,

देख ले नमूना कई ल्यायो मै चुनकर ,
मावस की मावस थे छांटइयो एक-एककर ,
रास जैसी आवे दादी बतलायो ................,

मान्गसू न दादी थान्सू मेहंदी मन्दाई,
भक्ति रो मो़ल कोई नाही जग माही,
अपनों आशीष बस दे जायो..........
मंडवा ले दादी मेहंदी ल्यायो. !!

सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे !!!

मैया को अपने घर बुलायेंगे
सारे मिलकर माँ का लाड लड़ायेंगे !

सोने की झारी में , गंगाजल मंगवाया ,
मैया के स्वागत में , चन्दन चौक पुराया
हाथों से चरणों को धुलायेंगे !
सारे मिलकर............

मैया की प्यारी सी , चुनरी है बनवाई,
चाँदी के प्याले में,मेहंदी है घुल्वाई
माँ के हाथो मेहंदी रचायेंगे !
सारे मिलकर............

मैया की नथली में , हीरा है जड़वाया
माथे की बिंदी को सोने में घडवाया ,
चाँदी की पायलिया पहनाएंगे !
सारे मिलकर............

फूलों के प्यारे से , गजरे है मंगवाए,
भक्त कहे थाली में , रोली मोली लाये,
हाथों से माँ को हम सजायेंगे !
सारे मिलकर............

ऐलान कर रहां हूँ मैं डंके की चोट पर...

ऐलान कर रहां हूँ मैं डंके की चोट पर,
मंदिर बनेगा दादी का हर एक मोड़ पर

जायेंगे पैसे वाले भी झोली पसर के
जायेंगे महाराजा वहां ताज उतर के
बैठे रहेंगे चरणों में घर बार छोड़कर ,
मंदिर बनेगा दादी का हर एक मोड़ पर

निकलोगे जिस गली से ये पैगाम मिलेगा
सबकी जुबान पे दादीजी का नाम मिलेगा
झंडे गडेंगे देश विदेशो के मोड़ पर
मंदिर बनेगा दादी का हर एक मोड़ पर

दुनिया के कोने कोने में सब जान जायेंगे
मेरी मैया की शक्ति को सब मान जायेंगे
तस्वीर भी छपेगी सरकारी नोट पर
मंदिर बनेगा दादी का हर एक मोड़ पर.

ल्याया थारी चुनरी, करियो माँ स्वीकार...

ल्याया थारी चुनरी , करियो माँ स्वीकार,
इमें साँचा साँचा हीरा और मोतियों की भरमार !!

चुनरी को रंग लाल चटक है, तारा भी चिपकाया माँ ,
बढियां पोत मंगायो जामे, गोटो भी लगवाया माँ ,
थे तो ओढ दिखाओ मैया,थारो मानंगा उपकार !!
ल्याया थारी चुनरी............

बस इतनी सी कृपा कर दे सेवा में लग-जावाँ माँ ,
म्हने तू इ लायक करदे ,चुनरी रोज चदावा माँ ,
बस टाबरिया पर बरसे , माँ हरदम थारो प्यार !!
ल्याया थारी चुनरी............

एक हाथ स भक्ति दीजे , एक हाथ स शक्ति माँ ,
एक हाथ स धन दौलत और एक हाथ स मुक्ति माँ,
तू तो हर हाथां स दीजे , माँ थारा हाथ हज़ार !!
ल्याया थारी चुनरी............

गर तू थारो बेटो समझे, सेवा बताती रह्ज्ये माँ,
'बनवारी' क्यां लायक समझो , काम उडाती रह्य्जे माँ,
म्हे तो रात-दिना बेठ्या हाँ , थारी सेवा में तैयार !!
ल्याया थारी चुनरी............

आओ ए सुहागन हिल मिल आओ...

आओ ए सुहागन हिल मिल आओ,
आओ मेरी बहना सब मिल आओ ,
राणी सती दादी जी का हाथ रचाओ ,
मेहंदी घोल के लाओ ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......

सबसे पहले चौक पुरावो,
चांदी की चौकी पे मैया न बिठावो ,
मंगल गीत सुनाओ ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......


ऐसी रचाओ जैसी रची गोकुल में ,
लागी तो छूटी कोनी बन्सुल कूल में ,
ऐसो ही घोल घुलाओ ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......


मेहंदी मांडावे मैया घने चाव सू,
मैया जी भूखा थारी भक्ति भाव सू ,
जय -जयकार लगाओ ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......

मेहंदी का हाथ ठाणे आशीष देसी ,
अन्न -धन रा कोठा भर देसी ,
बेगी सी आगे आओ ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......

भक्त मंडल या मेहंदी गावे ,
सरब सुहागन माँ का हरजस गावे ,
चरना में धोक लगावां ए ,
मांडो मैया जी के मेहंदी ......

Friday, May 21, 2010

Dhanya Dhanya Jhunjhnun Dham!!!

राजघराणा भी करें, आकर जठै प्रणाम
धन्य धन्य राजस्थली , धन्य झुंझुनू धाम
दादी जी थारी ज्योत जगे , जिन धरती पे अविराम
राजेश्वरी ओ म्हारी माँ !!!

सर्व सुहागन मावडी , सज सोलह सिंणगार
झुंझुनू नगर में सज रह्यो , माँ थारो दरबार
थारै भवन में बाजे शंख नगारा, गूंजे जै जैकार
बागे्शवरी ओ म्हारी माँ !!

तेरह मंड सुहावणा , निरख्यां जी हरषाय
जो आवे तेरे द्वार पे, तेरो तन्नै चढाय
मैंदी मोली काजल टिकी सूं, दैली पूजर जाय
परमेश्वरी ओ म्हारी माँ !!

दछसुता बणकर सती, जलमी नगर हिसार
शारदा जी कोख नै, धन्य करी सतनार
कोई धन्य धन्य गुरसामल जी , कोई धन्य थारो परिवार
माहेश्वरी ओ म्हारी माँ !!

मंगलमय थारी चूनडी, लहर लहर लहराय
तनधन जी निज हाथ सूं, चुनड देई ओढाय
मोटी सेठाणी टाबरियाँ पर , सुख सुहाग बरसाय
पूणैश्वरी ओ म्हारी माँ !!

दुर्गा सप्तशती थारी , महिमा नित्य सुणाय
शक्ति स्वरूपा हे सती, करज्यो आय सहाय
थारो चारण बण राजेंद्र , युगां तक मंगल थारा गाय
दुर्गेश्वरी ओ म्हारी माँ !!